
दुनिया ने देखा कि कैसे वेनेजुएला अमेरिका की भू-राजनीतिक स्क्रिप्ट का नया अध्याय बन गया। 3 जनवरी की तारीख, तेज़ हमले, सत्ता का पलटाव और फिर तेल पर सीधा दावा — कहानी किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं लगती।
लेकिन सवाल सिर्फ सत्ता का नहीं है। असल खेल है – वेनेजुएला का तेल।
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार: वेनेजुएला क्यों है सुपरपावर का टारगेट?
वेनेजुएला के पास अनुमानित 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार है — यानी सऊदी अरब से भी ज्यादा। इसका अधिकांश हिस्सा Orinoco Belt में मौजूद है, जिसे टेक्निकल भाषा में कहा जाता है:
Heavy Sour Crude Oil
सीधी भाषा में — गाढ़ा, चिपचिपा, ज्यादा कार्बन वाला और बेहद जिद्दी तेल। यह तेल जमीन से ऐसे नहीं निकलता जैसे मध्य-पूर्व का हल्का कच्चा तेल।
Oil Extraction: जब तेल निकालना ही आग से खेलना हो
वेनेजुएला का तेल तरल रूप में बाहर नहीं आता Steam Injection से पिघलाया जाता है। भारी ऊर्जा खर्च करता है। लागत आसमान छूती है।
यानि जितना तेल निकले, उससे पहले कार्बन और प्रदूषण निकलता है। यही वजह है कि कई एनर्जी एक्सपर्ट इसे “Climate Killer Oil” कहते हैं।
Refining Nightmare: अमेरिका के लिए भी आसान नहीं
अमेरिका दावा करता है कि उसके पास बेहतर रिफाइनिंग टेक्नोलॉजी है। लेकिन सच्चाई ये है Heavy crude को रिफाइन करना बेहद महंगा। ज्यादा मीथेन लीक का खतरा। आग और विस्फोट की संभावना। प्रति बैरल कार्बन उत्सर्जन दोगुना यानी अगर अमेरिका पूरा वेनेजुएला तेल निचोड़ता है तो जलवायु परिवर्तन का थर्मामीटर और तेज़ चढ़ेगा।

Climate Impact: तेल निकला तो धरती भुगतेगी
वेनेजुएला में पुराने रिफाइनिंग सिस्टम के कारण पहले ही प्रदूषण कई गुना बढ़ चुका है। स्थानीय आबादी प्रभावित है। जंगल और नदियाँ जहरीली हो रही हैं। अब अगर US-scale extraction शुरू होता है, तो इसका असर ग्लोबल टेम्परेचर, कार्बन टारगेट, Paris Climate Agreement सब पर पड़ेगा।
‘ग्रीन एनर्जी’ की बात और काले तेल की भूख!
एक तरफ अमेरिका दुनिया को Clean एनर्जी, Net जीरो, Climate Leadership का भाषण देता है… दूसरी तरफ 300 अरब बैरल काले तेल पर हाथ साफ करने की तैयारी।
सवाल ये नहीं कि अमेरिका तेल निकालेगा या नहीं सवाल ये है — कितनी कीमत पर?
दांव बड़ा है, जोखिम उससे भी बड़ा
वेनेजुएला का तेल अमेरिका के लिए ऊर्जा सुरक्षा हो सकता है लेकिन पर्यावरण, लागत और राजनीति — तीनों मोर्चों पर यह टिक टाइम बम भी है।
अगर ये योजना जमीन पर उतरी, तो इतिहास सिर्फ इतना याद नहीं रखेगा कि तेल निकला था, बल्कि ये भी कि धरती ने क्या खोया।
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